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शुक्रवार, 21 जून 2013

अन्ना का राजकीय आन्दोलन

नलोक पाल यह बिल पास होने से भारतीय संविधान को दुय्यम दर्जा मिलेगा. आरएसएस को बली का बकरा बना रही है. भारतीय संविधान को निरस्त, प्रभाव शुन्य करने के लिए जनलोक पाल का सहारा लेकर भारतीय संविधान पर हमला करने का कार्य अन्ना कर रहे है. अन्ना हिंदु है, हिंदु जातिवादी है, वर्णवादी है. भारतीय संविधान जाती-धर्म-वर्ण को नही मानता बल्कि उनकी तानाशाही खत्म करना चाहता है. इसलिए संघ परिवार कही बर्षो से संविधान पर टिप्पनी करते आया है.


जनलोक पाल के पदाधिकारी जनता के प्रतिनिधि नही होंगे, जो जनतंत्र चलनेवाले शासन और प्रशासन पर रोंब बनाते रहेंगे, इससे तो जनतंत्र का अपमान होगा. जनलोक पाल नाम है लेकिन इससे जनता का पालन-पोषण कैसे होगा? इस विषय पर उसमे कोई चर्चा और उपाय नही है. भ्रष्टाचार केवल आर्थिक ही नही होता, वह सामाजिक और नैतिक भी होता है. नीतिया अगर स्वार्थी रही तो परोपकार कैसे होगा?

जनलोक पाल से कही अच्छा भारतीय संविधान है, मगर उनका ईमानदारी से पालन किया होता तो भ्रष्टाचार नही होता. हम जिन धर्म को पालन करते है उनका हम पर ज्यादा प्रभाव है. भ्रष्ट धार्मिक नीतिया पालन करना जबतक सुरु रहेगा तब तक कितने भी कानून बनेंगे, उनका उल्लंगन होते ही रहेगा. भ्रष्टाचार को रोखने के लिए कानून बनाने की जरुरत नही तो धर्म बदल करने की जरुरत है, धम्म स्वीकार की जरुरत है. धम्म स्वीकार से ही भ्रष्टाचार नष्ट होगा. भ्रष्टाचार की शिक्षा देनेवाली मनुस्मृति निरस्त होगी. संविधान का यानि बुद्ध का शासन आएगा, जो भ्रष्टाचार से मुक्त होगा