शनिवार, 13 जून 2026

आरक्षण: जातिगत पिछड़ा समुदाय और अगड़ा समुदाय




 भारत में जातिगत आरक्षण संविधान द्वारा लागू है, उसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जातियों को उनके जनसंख्या के अनुपात में लागू है। उद्देश : आरक्षण द्वारा पिछड़े समुदाय को अगड़े समुदाय के बराबर लाना रहा हैं।


भारतीय समाज में सबसे अगड़ा समुदाय ब्राह्मण है, उनके बराबर = समतल लाने के लिए जातिगत आरक्षण लागू किया गया था। क्या आजादी के बाद जातिगत लागू होते हुए पिछड़ी जाति के लोग अगड़े जातियों के समुदाय के साथ खुले दिल से रोटी/बेटी व्यवहार / रिश्ते करते है? इसका जवाब है_नहीं। आरक्षणवादी लोगों ने अपने प्रगति को मापते वक्त निचले (महार) जातीय समुदाय से तुलना करने के बजाय, सबसे अगड़े (ब्राह्मण) जातियों के साथ तुलना करनी चाहिए।


महाराष्ट्रीयन समाज में महार (Bouddh) और माँग (Hindhu) इन दो जातियों में मतभेद है। मांगो को ब्राह्मण लोगोने गलत जानकारी दी है, वह यह है_ तुम्हारे हिस्से के आरक्षण के कारण महार जाति के लोग उन्नत हुए, तुम्हे पीछे रहना पड़ा, अब इसपर इलाज एक ही है कि आर्थिक आधारपर SC का वर्गीकरण करके उन्नत जातियों को अनुसूचित जातियों के आरक्षण को वंचित किया जाय तो मांगो को पर्याप्त आरक्षण मिलेगा और उनका विकास होगा।


यह सुझाव मांग जातियों के कुछ लोगों को अच्छा लगा और वे जातिगत आरक्षण को "आर्थिक" आधारपर वर्गीकरण करने के लिए तैयार हुए। वे यह भूल गए कि उन्नत ब्राह्मण जातियों से उन्हें अपने प्रगति की तुलना करनी है। और पिछड़े /महार जातिय समुदाय के ख़िलाफ़ राजनीति करने लगे। जंग अगर लड़नी ही है तो आरक्षण विरोधी ब्राह्मण लोगो से लड़नी चाहिए, मगर आरक्षणवादी समुदाय आपस में लड़ने लगे तो आरक्षण का भविष्य क्या होगा?


मेरी राय यही है कि आरक्षवादी लोगों ने आर्थिक आधारपर दिये गये आरक्षण का पुरजोर विरोध करना चाहिए और जातिगत आरक्षण की माँग जोरशोर से उठानी चाहिए।

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